भावनाओं का सागर
मेरे दिल में उमड़तीं हुईं भावनाएं
Followers
Monday, November 3, 2014
दुल्हन फोजी की
~~हाइकु~~
छोड़ गया है
सजि सेज मेरी वो
क्या करू मैं
मिलना पाई
सरहद चला वो
घबराऊ मैं
आना तू जल्दी
नष्ट कर दुश्मन
धीर धरु मैं
खुस हो जाऊ
जाके वीर बाहों में
इठलाऊ मैं
गर्व तुम से
तुम्हारी ही पत्नी जी
कहलाऊ मैं
देवेन्द्र सगर "सागर"
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Comments (Atom)