ना आओ मेरे शहर तो अच्छा ही है
मेरे शहर के हालत बदल गए.....
टूट पड़ते है औरतो पर चील-कौओ की तरह...
इंसानियत बाले लोगो के ख्यालात बदल गए....
मानभंग कर निर्वस्त्र लटका देते है पेड़ो पर लाशे
संवेदनाए ख़त्म हुई लोगो के जज्बात बदल गए...
खो गए रिश्ते-नाते चकाचौध की भीड़ में
कर खून विश्वास का वो हर बार बदल गए....
बो दिल बदल गए बो लोग बदल गए
ना आओ मेरे शहर के हालात बदल गए....
देवेन्द्र "सागर"
०९/०७/२०१४

Good poet
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