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Friday, July 25, 2014

एकलव्य


         "एकलव्य"

वनों का था वनबासी
जो सभ्यता में था सभ्य,,,
था वीर धनुर्धर बो एकलव्य,,,

क्या वनबासी होना
था उसका अपराध,,,,
क्या इसी लिऐ नहीं था
बो गुरुशिक्षा का हकदार,,,,

छला द्रोण ने
फिर भी पंहुचा अपने
गंतव्य,,,,
खीच बाण उंगलियों से
धर्मयुद्ध में बना 
श्रेष्ट धनुर्धर एकलव्य,,,

माँगा जो द्रोण ने
अंगूठा दांए हाथ का
दे दिया गुरु मान कर,,,,
चला सकुगा ना वाण कभी,
गुरु दक्षिणा दी ये जान कर,,,,

शिष्य परम्परा में अमर हुआ,
था द्रोण से जिसका
व्यक्तित्व भव्य,,,,
था बो वीर धनुर्धर 
एकलव्य,,,

देवेन्द्र "सागर"
२५-०७-२०१४


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