बो भारत माँ का सपूत "आजाद"था
कैसे रहता बंधन में पंक्षी स्वतंत्र गगन का
चिड़िया नहीं, चील नहीं, बो तो वाज था
स्वतंत्र परिन्दे जैसा जिया जीवन जिसने
बो भारत माँ का सपूत "आजाद" था
लड़के लेगे आजादी किया जिसने शंखनाद था
बो भारत माँ का सपूत "आजाद" था
अंग्रेजो का जो लूटा बड़ा खजाना
थर्राए फिरंगी किया वीरता का काज था
भारत के कण-कण को भी जिसपर नाज था
बो भारत माँ का सपूत "आजाद" था
नापाक हाथ कोई छूए शरीर को
कहाँ ऐ उस वीर को बर्दास्त था
मारे मुझे कोई औकात भला क्या उसकी
बो माँ का शेर भरे वीरो सा सहास था
लड़ते-लड़ते चुनी खुद ही मौत
बो कहाँ यमराज का मोहताज था
लिख गया इतिहास आजादी का 'लहू' से
बो भारत माँ का सपूत "आजाद" था
देवेन्द्र "सागर"
१७-०७-२०१४

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