भविष्य नहीं मैं भूत हूँ
क्यों की मैं अछूत हूँ
चाहे जितना हो हुनर मुझ में
फिर भी करतूत हूँ
क्योकि मैं अछूत हूँ
एकलव्य हूँ मैं
छल का सबूत हूँ
क्योकि मैं अछूत हूँ
कहे जग दानवीर कर्ण मुझे
ममता भी अपना ना
पाई मुझे कुन्ती का
बड़ा पूत हूँ
क्योकि मैं अछूत हूँ
बन रानी लक्ष्मी लड़ी खूब
समर में अंग्रेजो से
मैं झलकारी हूँ
वीरता की मूर्त हूँ
इतिहास के पन्नो में दबी पड़ी हूँ
क्यों की में अछूत हूँ
आकर एक है
रक्त एक है
कहने को तो
भारत माँ का सपूत हूँ
फिर भी सबसे अलग हूँ
अस्पर्स हूँ
क्यों की में अछूत हूँ
देवेन्द्र " सागर "
३१-०७-२०१४

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