हाँ मैं जनता हूँ
मैं तुम्हारे जीवन में
कड़वे नीम की तरह हूँ
मैं मेरा अस्तित्व
तुम्हें सदैव खिन्ता देने बाला
कड़बाहट भरने बाला
पर जब तुम चल कर
थक जाओगी
दूर दूर तक किसी को
साथ ना पाओगी..
तब मैं बनुगा तुम्हारी
छाया और अपने
स्नेह प्यार की हवा
के झोको से थकान
मिटाऊंगा
अपनी वाहों में लेके
सुलाऊंगा...
जब तुम्हारा हिर्दय
कुंठित होकर
दर्द से चितकार
करेगा
और हिर्दय का अकेलापन
आहाकर करेगा
तब मैं तुम्हारे
अन्तर मन में
कड़वे और अप्रीय
नीम की तरह
औषधी बनकर
घुल जाऊंगा
और तुम्हारे सारे
दर्द मिटा चहरे पर
एक खिलखिलाती
हँसी लाऊंगा...
तुम मुझे चाहो
या ना चाहो
मैं तुम्हारा साया
बन कर खड़ा हूँ
हाँ मेँ तुम्हारे जीवन में
कड़वे नीम की तरह हूँ
देवेन्द्र सगर
01/11/2015

बहुत बढ़िया
ReplyDeleteनीम कड़वा जरूर है लेकिन बहुत उपयोगी भी
सब दुखहरन सुखकर परम हे नीम! जब देखूँ तुझे।
ReplyDeleteतुहि जानकर अति लाभकारी हर्ष होता है मुझे॥
ये लहलही पत्तियाँ हरी, शीतल पवन बरसा रहीं।
निज मंद मीठी वायु से सब जीव को हरषा रहीं॥
हे नीम! यद्यपि तू कड़ू, नहिं रंच-मात्र मिठास है।
उपकार करना दूसरों का, गुण तिहारे पास है॥
नहिं रंच-मात्र सुवास है, नहिं फूलती सुंदर कली।
कड़ुवे फलों अरु फूल में तू सर्वदा फूली-फली॥
तू सर्वगुणसंपन्न है, तू जीव-हितकारी बड़ी।
तू दु:खहारी है प्रिये! तू लाभकारी है बड़ी॥
है कौन ऐसा घर यहाँ जहाँ काम तेरा नहिं पड़ा।
ये जन तिहारे ही शरण हे नीम! आते हैं सदा॥
तेरी कृपा से सुख सहित आनंद पाते सर्वदा॥
तू रोगमुक्त अनेक जन को सर्वदा करती रहै।
इस भांति से उपकार तू हर एक का करती रहै॥
प्रार्थना हरि से करूँ, हिय में सदा यह आस हो।
जब तक रहें नभ, चंद्र-तारे सूर्य का परकास हो॥
तब तक हमारे देश में तुम सर्वदा फूला करो।
निज वायु शीतल से पथिक-जन का हृदय शीतल करो॥