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Tuesday, June 17, 2014

मेरे पास नहीं है पापा

जब भी सुनता हूँ 
दो अक्षर 'पा''पा'
गूंज कर अंतरमन में
विलीन हो जाते है
क्या है इन अक्षरों की
सार्थकता....?
बस मैं ढूंढता रहजाता हूँ
और सुनकर इन अक्षरों को
भावविभोर हो जाता हूँ
एक धुंदली सी तस्वीर
ऊँगली पकड़ के घुमाते हुऐ
उभर आती है कभी भी
हिर्दय पटल पर 
जो कभी देखी होगी
नन्ही सी आँखों ने
कर जाती हैं मुझे निशब्द
क्या है "पापा"....?
मैं नही कह सकता
क्योकि मेरे पास नहीं है "पापा"

   

देवेन्द्र "सागर"

17/06/2014

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