जो कहते है हमसे प्यार बहुत
बो देते है हमको दर्द बहुत
साथ रहते है बो हमारे 'हरदम'
फिर भी हमेशा है दूर बहुत
उतारा नहीं हमे कभी दिल के पैमाने में
बिन पिये कह दिया साकी कडबा तेरा जाम बहुत
हमे देख कर दर्द में, आता है उन्हें मजा बहुत
हँसता मैं रोता दिल, ऐ दिल्लगी की सजा बहुत
चलते है बो पकड़ कर हाथ मेरे साथ
बिखेरते हुए कांटे इन काँटों की चुभन बहुत
कैसे कटेगा जिन्दगी का ऐ सफर
बाँकी अभी गुमनाम रहो पर सफर बहुत
देवेन्द्र "सागर"
१९/०६/२०१४

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