♡♡ मेरा बचपन पुराना ♡♡
धुंदली सी यादें रहगई है अब नजरो में
जिसे देखे हुऐ बीत गया एक जमाना
आज शहर कि चार दीबारियो में
बो जाने कहाँ खोकर रह गया है
बचपन का मेरा अपना जमाना
याद आता है मुझे मेरा बचपन पुराना ....
बो बचपन का रोना रोते-रोते सो जाना
गांव कि धूल में भागना ओरो को भगाना
पेड़ पर चढ़ना चढ़कर कूद जाना
पेड़ पर छुपना छुपकर चिल्लाना
बो पूँछाले बाली पतंगे उड़ाना बो पेच लड़ना
याद आता है मेरा बचपन पुराना
याद आता है गांव में वर्षात का आना
गड्डो के पानी को छप-छप करके उचकाना
पानी में भीगना और भाग-भाग कर नहाना
बो कागज कि नाव चलना डूबने पर रूठ जाना
बो गांव कि कीचड़, कीचड़ में कूद जाना
याद आता है मुझे मेरा बचपन पुराना. ...
याद आती है बो चूल्हे कि रोटियां
बो अष्ट - चंगा कि गोटियां
बो पुराने गिल्ली - डंडा के खेल
बो माचिस कि डिब्बियों कि रेल
जहेन में आज भी है बो दादी के
किस्सो का खजाना
याद आता है मुझे मेरा बचपन पुराना. ...
याद आता है दूर पहाड़ियों पर जंगल
बो मेलो में पहेलबानो का दंगल
बो मुर्गे -मुर्गियों का आपस लड़ना
बो बैलगाड़ियों का दौड़ में भगाना
बो बंदूको से गुब्बारों पर निसाना लगाना
याद आता है मुझे मेरा बचपन पुराना. ....
याद आती है बो चिड़ियों कि चहक
खेतो में भीगी-भीगी मिट्टी की महक
बो लहराती फसलो कि हरियाली
बो भोर के सूरज कि लाली
बो बदलो कि घटा काली
बो स्कूल न जाने का झुटा सा बहाना
याद आता है मुझे मेरा बचपन पुराना. ........
सिमट गयी बो यादें मेरे ही मन में
कही खोगया मेरा बचपन मेरे ही तन में
कहाँ गई बो छोटी-छोटी कतरो बाली चिड़िया
दिखती है तो बस ऊँची-ऊँची इमारते गगन में
क्या करे कैसे समझाए मन "सागर" दीवाना
याद आता है मुझे मेरा बचपन पुराना. .......
देवेन्द्र " सागर "
२५-०२-२०१४

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