तुम्हारी ये आँखे.....
मुझे दीवाना बना गई
तुम्हारी ये आँखे....
मेरी आँखों से नीद
चुरालेगइ
तुम्हारी ये आँखे....
दिल की बात इशारो
में समझा गई
तुम्हारी ये आँखे....
लोग जाते है मय पीने
मयखाने
नशा-ए-खुम करागई
तुम्हारी ये आँखे....
कैसे करू शुक्रिया इनका
मेरी दुनिया को जन्नत
बनागई
तुम्हारी ये आँखे....
देवेन्द्र "सागर"
01-04-2001

No comments:
Post a Comment