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Tuesday, September 22, 2015

नीम



 
हाँ मैं जनता हूँ
मैं तुम्हारे जीवन में
कड़वे नीम की तरह हूँ
मैं मेरा अस्तित्व 
तुम्हें सदैव खिन्ता देने बाला
कड़बाहट भरने बाला

पर जब तुम चल कर
थक जाओगी
दूर दूर तक किसी को
साथ ना पाओगी..

तब मैं बनुगा तुम्हारी
छाया और अपने 
स्नेह प्यार की हवा
के झोको से थकान
मिटाऊंगा
अपनी वाहों में लेके
सुलाऊंगा...

जब तुम्हारा हिर्दय
कुंठित होकर 
दर्द से चितकार
करेगा
और हिर्दय का अकेलापन
आहाकर करेगा

तब मैं तुम्हारे
अन्तर मन में
कड़वे और अप्रीय
नीम की तरह
औषधी बनकर
घुल जाऊंगा

और तुम्हारे सारे
दर्द मिटा चहरे पर
एक खिलखिलाती
हँसी लाऊंगा...

तुम मुझे चाहो 
या ना चाहो
मैं तुम्हारा साया
बन कर खड़ा हूँ
हाँ मेँ तुम्हारे जीवन में
कड़वे नीम की तरह हूँ

देवेन्द्र सगर

01/11/2015