हाँ मैं जनता हूँ
मैं तुम्हारे जीवन में
कड़वे नीम की तरह हूँ
मैं मेरा अस्तित्व
तुम्हें सदैव खिन्ता देने बाला
कड़बाहट भरने बाला
पर जब तुम चल कर
थक जाओगी
दूर दूर तक किसी को
साथ ना पाओगी..
तब मैं बनुगा तुम्हारी
छाया और अपने
स्नेह प्यार की हवा
के झोको से थकान
मिटाऊंगा
अपनी वाहों में लेके
सुलाऊंगा...
जब तुम्हारा हिर्दय
कुंठित होकर
दर्द से चितकार
करेगा
और हिर्दय का अकेलापन
आहाकर करेगा
तब मैं तुम्हारे
अन्तर मन में
कड़वे और अप्रीय
नीम की तरह
औषधी बनकर
घुल जाऊंगा
और तुम्हारे सारे
दर्द मिटा चहरे पर
एक खिलखिलाती
हँसी लाऊंगा...
तुम मुझे चाहो
या ना चाहो
मैं तुम्हारा साया
बन कर खड़ा हूँ
हाँ मेँ तुम्हारे जीवन में
कड़वे नीम की तरह हूँ
देवेन्द्र सगर
01/11/2015
