Followers

Monday, February 8, 2021

मैं आदिवासी हूँ

हाँ! मैं आदिकाल से यहाँ रहने बाला, आदिवासी हूँ...

अनाधुन्द जंगल काटे किसी ने  ना दुख बांटे
पर किसी के भय से छोड़े नही जंगल,
हाँ मैं यहाँ का ही रहवासी, गिरीवासी,वनवासी हूँ
हाँ! मैं आदिकाल से यहाँ रहने बाला ,आदिवासी हूँ

जंगल , नदी, झरने, पहाड़, ये सब मेरा घरद्वार,
हाथी, घोड़े, ऊंट, शेर, सियार आदि पशु मेरे यार
प्रकृति मेरी सम्पदा, पर दिल से सन्यासी हूँ
हाँ! मैं आदिकाल से यहाँ रहने बाला आदिवासी हूँ
देवेन्द्र सगर "सागर"
दिनांक ०९/ ०८/२०२०

बेटियां

बेटियों को सीखा दो हड्डियां तोड़ना
रोटियां तो बो फिर भी बना लेंगी,,,।
दे दो उन्हें दरिन्दों को जलाने का हुनर
चूल्हा तो बो फिर भी सुलगा लेंगी
सिखादो पागल जनबरो में नकेल डालना
घर तो बो फिर भी सजा लेंगी
भरदो बेटियों में बेटो सा साहस
सीखा बचाना खुदको, तो फिर मुस्कुरा लेंगी,,,।
देवेन्द्र सगर "सागर"
06/10/2020