डबरा का मान है
साहित्य की शान है
दादा ते,,,,,,
प्रेम की खान है
दोस्ती की पहचान है
दादा ते,,,,,
मोहब्बत का रवि है
डबरा का कवि है
दादा ते,,,,,
दोस्ती की धुकधुकी है
प्यारी सी गुदगुदी है
दादा ते,,,,
वात्सल्य में खाला है
गम में शराब का प्याला है
दादा ते,,,,,,
डबरा की पहचान बनाएं
काव्य जगत में शिखर पर जाएं
दादा ते,,,,,