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Tuesday, September 22, 2015

नीम



 
हाँ मैं जनता हूँ
मैं तुम्हारे जीवन में
कड़वे नीम की तरह हूँ
मैं मेरा अस्तित्व 
तुम्हें सदैव खिन्ता देने बाला
कड़बाहट भरने बाला

पर जब तुम चल कर
थक जाओगी
दूर दूर तक किसी को
साथ ना पाओगी..

तब मैं बनुगा तुम्हारी
छाया और अपने 
स्नेह प्यार की हवा
के झोको से थकान
मिटाऊंगा
अपनी वाहों में लेके
सुलाऊंगा...

जब तुम्हारा हिर्दय
कुंठित होकर 
दर्द से चितकार
करेगा
और हिर्दय का अकेलापन
आहाकर करेगा

तब मैं तुम्हारे
अन्तर मन में
कड़वे और अप्रीय
नीम की तरह
औषधी बनकर
घुल जाऊंगा

और तुम्हारे सारे
दर्द मिटा चहरे पर
एक खिलखिलाती
हँसी लाऊंगा...

तुम मुझे चाहो 
या ना चाहो
मैं तुम्हारा साया
बन कर खड़ा हूँ
हाँ मेँ तुम्हारे जीवन में
कड़वे नीम की तरह हूँ

देवेन्द्र सगर

01/11/2015

Saturday, April 11, 2015

महात्मा ज्योतबा फुले

सब को मिले न्याय
              अधिकार हो मुलभुत
सब के लिए हो शिक्षा
              पढ़ भी सके अब अछूत
ऐसे जन्मे महान ज्योतिबा
                 ज्ञानी वीर सपूत
जो दलितों के लिए
               बने शिक्षा के अग्रदूत
देवेन्द्र सगर "सागर"

Friday, March 13, 2015

नारी का सम्मान करो




नहीं तुम अपमान करो
नारी का सम्मान करो
बो क्यारी है प्रेम की
तुम पुष्प अंकुरित उसी के
उसी से होकर पलवित तुम ने
गए है गीत ख़ुशी के...
मूरत है वो त्याग की
उसके त्याग का अभिमान करो
नहीं तुम अपमान करो
नारी का सम्मान करो...
छोड़ घर-द्वार सब अपना
लगी पूर्ण करने बो तेरा सपना
उन सपनो में उसकी भी जुडी हैं
छोटी-मौटीसी कड़ियाँ
उन कड़ियों का ध्यान धरो
उसकी इच्छाओ का भी मान करो
नहीं तुम अपमान करो
नारी का सम्मान करो...
      देवेन्द्र "सागर"

Thursday, February 26, 2015

तडफता रहा





पल-पल तड़फता रहा
तेरी महोब्बत के लिए
हाए मैं....
जिन्दगी यूँ ही गुजर गई
आहिस्ता-आहिस्ता दर्द के
सायॆ में.....
देवेन्द्र "सागर"

Tuesday, January 27, 2015

बसंत पंचमी



प्यार की ऋतू आई
बसंत बहार लाई
खेतो मे सरसों लहराई
फूल पलास खिल जाई

वन महके मन महेके
योवन ने ली अगड़ाई
सब युगलों को हिर्दय से
बसंत पंचमी की बधाई..

देवेन्द्र "सागर"
24/01/2014