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Saturday, July 7, 2018

हाईकू


०१
मन के भाव
भरले तू उड़ान
टूटा पिंजरा
०२
खोल पिंजरा
भरने दे उड़ान
बेटी चहके
०३
आजाद पाखी
उन्मुक्त गगन में
पंख पसारे
०४
कैद में पक्षी
सिमटती जिंदगी
मरते भाव
देवेन्द्र सगर
  "सागर"
प्रसव पीड़ा
मन हुआ चिंतित
हुई बिटियाँ

बेटी की रक्षा
ह्रदय की वेदना
माता का साया

घबराता जी
असुरक्षित बेटी
मन का भय
देवेन्द्र सगर "सागर"