गर किस्मत में नहीं तू मेरे लिए
फिर क्यूँ धडकता है दिल तेरे लिए....
तेरी धड़कनो को अहसास नहीं मेरा
फिर क्यूँ तड़फता है दिल तेरे लिए....
लवो से जब कोई नाम ले जो तेरा
तो क्यूँ भड़कता है दिल तेरे लिए....
गर तड़फना ही है महोब्बत की तासीर
तो तड़फता रहे यूँही मेरा दिल तेरे लिए...
देवेन्द्र "सागर"
१८/०९/२०१४

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