बेटियों को सीखा दो हड्डियां तोड़ना
रोटियां तो बो फिर भी बना लेंगी,,,।
दे दो उन्हें दरिन्दों को जलाने का हुनर
चूल्हा तो बो फिर भी सुलगा लेंगी
सिखादो पागल जनबरो में नकेल डालना
घर तो बो फिर भी सजा लेंगी
भरदो बेटियों में बेटो सा साहस
सीखा बचाना खुदको, तो फिर मुस्कुरा लेंगी,,,।
देवेन्द्र सगर "सागर"
Sahi kaha
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