लगता है कितना भोला कितना प्यारा
पर है नहीं इतना माशूम तेरा चहरा
जताती हो प्यार जो बेसुमार हमपर
जानते है इसमें फरेब छुपा बहुत गहरा
कैसे समझू तुझको तेरी महोब्बत को
हर तरफ लगा रखा है साजिसो का पहरा
जो तीर दागे तूने नफरतो के प्यार से
किस को दिखाऊ बो जख्म दिया हुआ तेरा
"सागर" दाग-ऐ-दिल धोए कैसे..?
मेरी आँखों का पानी आँखों में ठहरा
देवेंन्द्र "सागर"

सभी पाठको को हिर्दय से धन्यबाद
ReplyDeleteआप का देवेन्द्र