"फूल पलाश का"
आफताब की चिलचिलाती धूप
घबरा जाते है सभी देख गर्मी मै
ज्वलित तपिस रूप
डर से उसके डर जाते है
नहीं जो सामना करपाते है
सूख जाते है बो पत्ते-पत्ते और वृछ
टिकना पाते उसके समक्ष
आफताब की ज्वाला में जलजाते
न जाने ऐसे कितने वृछ
जो उस से डटकर लड़ता है
जो उसकी ज्वाला में जलकर खिलता है
संघर्षो में भी मुस्कुराना
है जिसका सिद्धांत मूल
वो वृछ पलाश और उसका फूल
प्रकर्ति हमे सिखाती है
जीवन एक संघर्ष है
संघर्षो से न घबराना
जीवन की तपिस में बन फूल पलाश
तुम खिलते ही जाना, खिलते ही जाना.....
देवेन्द्र "सागर"

आफताब की चिलचिलाती धूप
घबरा जाते है सभी देख गर्मी मै
ज्वलित तपिस रूप
डर से उसके डर जाते है
नहीं जो सामना करपाते है
सूख जाते है बो पत्ते-पत्ते और वृछ
टिकना पाते उसके समक्ष
आफताब की ज्वाला में जलजाते
न जाने ऐसे कितने वृछ
जो उस से डटकर लड़ता है
जो उसकी ज्वाला में जलकर खिलता है
संघर्षो में भी मुस्कुराना
है जिसका सिद्धांत मूल
वो वृछ पलाश और उसका फूल
प्रकर्ति हमे सिखाती है
जीवन एक संघर्ष है
संघर्षो से न घबराना
जीवन की तपिस में बन फूल पलाश
तुम खिलते ही जाना, खिलते ही जाना.....
देवेन्द्र "सागर"

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