वो सितमगर सितम करता गया, करता गया
मैं महोबत में सहती गई, सहती गई .......
बो मुझसे बदुआ कहता गया, कहता गया
मैं उसके लिए दुआ करती गई, करती गई ....
बो अपने जुल्मो से मुझे डराता गया, डराता गया
महोबत रुसबा ना हो मेरी इसलिए मैं डरती गई,
डरती गई ......
क्या करती बड़ी सिद्दत से चाहती थी उसको
बो पल-पल मारता गया मैं मरती गई, मरती गई .....
देवेन्द्र "सागर"
२३-०२-२०१४

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