वक़्त तो चाहिय. ..
एक बार ही करना होता दीदार तो बात और थी
ताउम्र देखना है ताबेरुखे यार वक्त तो चाहिए ....
सुनना होता इजहार-ऐ-महोब्बत जुबा से उनकी
तो बात और थी
महोब्बत में उतारना है उनको अपनी, वक्त तो चाहिए...
पाना होता जो जिस्म उनका तो बात और थी
जोड़ना हे अहसास धड़कनो से धड़कनो का
वक्त तो चाहिए ....
निभाना होता साथ कुछ देर का तो बात और थी
पाना है साथ जीवन भर का वक्त तो चाहिए ....
खोना होता जो हुज़ूम में तो बात और थी
खोजना है खुद को उन मै वक्त तो चाहिए .....
देवेन्द्र " सागर "
०६-०४-२०१४

👌
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