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Thursday, April 17, 2014

बिन तेरे सब अधुरा

जिस तरह .........

बिन सुगंध के पुष्प अधूरे
बिन पत्तो के वृछ अधूरे
बिन कल-कल के झरने अधूरे
बिन ऊचाई के पर्वत अधेरे
बिन जल के नदियां अधूरी
बिन मिटटी के भूमि अधूरी
बिन चाँद के रात अधूरी
बिन बादल के बरसात अधूरी
बिन अश्क़ के अखियाँ अधूरी
बिन श्रंगार के दुल्हन अधूरी

        उसी तरह ...........

बिन तुम्हारे ,,,,,
     में अधूरा .....
     मेरा प्यार अधूरा ....
     मेरा जीवन अधूरा ......

देवेन्द्र " सागर "




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