मैं जब भी मयखाने जाता हूँ
मैं मय से मे भूल जाता हूँ
कोई नहीं पराया सब अपने से लगते है
जब मैं मय में डूब जाता हूँ
इसलिए मैं मयखाने जाता हूँ ................
मेरी यादों में आता नहीं कोई अब
उस कि जफ़ाओ से नाता नहीं कोई अब
मय से मैं उसको भूल जाता हूँ
इसलिए मैं मयखाने जाता हूँ ..................
एक जाम और पियूँगा मैं उस के नाम का
जो साथी न बन सका मेरे मुकाम का
पी कर मैं मय को कुछ लम्हे जी जाता हूँ
इसलिए मैं मयखाने जाता हूँ ..................
"रिंकू सागर "

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