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Friday, April 18, 2014

सागर

"सागर"

जब सताती है तन्हाई
तो लिख लेते है कलाम
पढने से पहले
"सागर" का सलाम.....

अथाय है " सागर " विशाल है "सागर"
"सागर" में उछाल आता नहीं 
डूब जाऐ "सागर" के अंतर मन में 
फिर "सागर" से बहार जाता नहीं 

ले जाते है नीर बदल "सागर" से
जग जीवन करते खुशहाल
सब की ख़ुशी देख कर "सागर"
हो जाता है निहाल.......

देवेन्द्र "सागर"
२६-०२-२०१४


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