आज मेरे शहर डबरा में,,,,,,,,
बरसात सुबह से रात बंद हुई
पहले सर्द हवा फिर ठण्ड हुई ......
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ऐ मौसम तेरी क्या बेरुखी है हम से
एक उनका साथ नहीं और करदी सर्द राते .... ?
जैसे तैसे कट रही थी ये राते
अब किस से कहे दिल कि बाते
और भी बोझिल कर दी राते ...
पलकों का झपकना दुस्बार हुआ
मिलती नहीं बो गर्म सांसे ....
खो गई कही वो खुशबू उन के बदन कि
और कही - अनकही बाते ......
तड़फा रही है बो बोसा बाली सोगाते
बड़ी वे -दर्द हो गई है ये तन्हां सर्द राते .....
देवेन्द्र "सागर "

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