
अपने रक्त से सीच कर
प्राणदान देती माँ
खुद सारे कष्ट सहती माँ
कष्टों में हँसते हँसते रहती माँ
मुख से कुछ न कहती माँ
समझ ना आये बो जज्बात है माँ
कही-अनकही बात है माँ
मुसीबतों में साथ है माँ
खुशियों की वर्षात है माँ
प्यार-दुलार की सोगात है माँ
जीवन के अंधियारे में
पूर्णिमा की रात है माँ
देवेन्द्र "सागर"
२६-०४-२०१४
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