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Saturday, April 26, 2014

"माँ"

   


     अपने रक्त से सीच कर
     प्राणदान देती माँ
     खुद सारे कष्ट सहती माँ
     कष्टों में हँसते हँसते रहती माँ
     मुख से कुछ न कहती माँ
     समझ ना आये बो जज्बात है माँ
     कही-अनकही बात है माँ
     मुसीबतों में साथ है माँ
     खुशियों की वर्षात है माँ
     प्यार-दुलार की सोगात है माँ
     जीवन के अंधियारे में
     पूर्णिमा की रात है माँ

     देवेन्द्र "सागर"
     २६-०४-२०१४


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