तेरे दर्द कि खलिश ने ताउम्र
चैन से सोने न दिया ........
हम तो सिर्फ तेरे ही थे पर
तूने कभी अपना होने न दिया....
हम देते रहे तुम्हे महोब्बत सौगातो में
तिल - तिल मरते रहे फिरके में.....
मेरी चाहत कि सुंदरता को देख न सकी
तेरी नजरे लगी रही खुद के तराजे में....
(फिरके- व्योग कि पीड़ा )
( तराजे- सृंगार )
देवेन्द्र " सागर "
२८-०३-२०१४

Nice. ...
ReplyDeleteBahut hi sundar
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