भावनाओं का सागर
मेरे दिल में उमड़तीं हुईं भावनाएं
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Thursday, April 24, 2014
सूल की सईया
तू सूल की सईया बना मेरे लिए
मैं अपने जिस्म को बिछोना बना लूगा
ज़माने भर के गम दे तू मुझको
इन सूलो मे भी मैं फूलो का ऐहसास करा दूगा
देवेन्द्र "सागर"
२४-०४-२०१४
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