Followers

Thursday, December 11, 2014

तू कहाँ है मेरी माँ

आज भी है अहसास
मुझे तुम्हारे कोमल
सुखद स्पर्श का
जब तुम फेरती थी
मेरे बालो में प्यार से
अपने हाथो की
कोमल उँगलियाँ
और में भूल कर सब कुछ
जन्नत का अहसास
करता था
कहाँ खो गया बो
सुखद स्पर्स
याद करता हूँ तो
कुंठित होती है मेरी जाँ
तू कहाँ है मेरी माँ
तू कहाँ है मेरी माँ

"सागर"
08/12/2014


No comments:

Post a Comment