तू कहाँ है मेरी माँ
आज भी है अहसास
मुझे तुम्हारे कोमल
सुखद स्पर्श का
जब तुम फेरती थी
मेरे बालो में प्यार से
अपने हाथो की
कोमल उँगलियाँ
और में भूल कर सब कुछ
जन्नत का अहसास
करता था
कहाँ खो गया बो
सुखद स्पर्स
याद करता हूँ तो
कुंठित होती है मेरी जाँ
तू कहाँ है मेरी माँ
तू कहाँ है मेरी माँ
"सागर"
08/12/2014
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