बाल भीगे
पलके भीगे
चहरे से ढरकती
मेघा तेरी बूंद,,,,
तन भीगा
बदन भीगा
वस्त्रों से सरकती
मेघा तेरी बूंद,,,,
अक्स भीगे
अश्क भीगे
अधरो पे लरज़ती
मेघा तेरी बूंद,,,,
बिजली चमकी
बदल गरजे
पक्षी भीगे
पत्ते भीगे
छम छम बरसती
मेघा तेरी बूंद,,,,
खूब उमड़ी
काली बदरी
मन ने लगाई
तन्हाई की छतरी
मन को ना भिगोपाती
मेघा तेरी बूंद,,,
देवेन्द्र सगर "सागर"
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