जिन को देखा करते थे ख्बाबो में
मालूम नहीं तुम बो ही ही या और कोई
जो अप्सरा सोते से जगाती थी स्वप्न में
मालूम नहीं तुम बो ही हो या और कोई
कल्पनाओ के ताने-बाने बुना करते थे मन में
मालूम नहीं तुम बोही हो या और कोई
जिन के लिए हर पल बेचेन रहा करते थे
मालूम नहीं तुम बो ही हो या और कोई
दिल चाहता है तुम्हे देखते रहे हर दम
कोई भी हो बड़ी कमसिन हो तुम
देख कर आँखों पर यकीन ना रहा
मालूम नहीं तुम तुम्ही हो या और कोई...
देवेंन्द्र "सागर"
06/10/1995

मालूम नहीं तुम बो ही ही या और कोई
जो अप्सरा सोते से जगाती थी स्वप्न में
मालूम नहीं तुम बो ही हो या और कोई
कल्पनाओ के ताने-बाने बुना करते थे मन में
मालूम नहीं तुम बोही हो या और कोई
जिन के लिए हर पल बेचेन रहा करते थे
मालूम नहीं तुम बो ही हो या और कोई
दिल चाहता है तुम्हे देखते रहे हर दम
कोई भी हो बड़ी कमसिन हो तुम
देख कर आँखों पर यकीन ना रहा
मालूम नहीं तुम तुम्ही हो या और कोई...
देवेंन्द्र "सागर"
06/10/1995

bahut acche
ReplyDeleteधन्यबाद भैया
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