मनाऊ कैसे
दर्द है कितना बताऊ कैसे
दास्ताँ दिल की सुनाऊ कैसे
"दिया" तो है पास मेरे
बिन बाती जलाऊं कैसे
करते नही अब प्यार हमसे
दर्दे दिल बताऊ कैसे
कैसे जला आशियाना मेरा
लगी आग अब बुझाऊ कैसे
हुई खता क्या बताओ जरा
उलझी गुत्थी सुलझाऊ कैसे
रूठ गई तो कोई बात नहीं
बस इतना बताओ मनाऊ कैसे
देवेन्द्र"सागर"
३१-०८-२०१४
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