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Sunday, August 31, 2014

मनाऊ कैसे


दर्द है कितना बताऊ कैसे
दास्ताँ दिल की सुनाऊ कैसे

"दिया" तो है पास मेरे
बिन बाती जलाऊं कैसे

करते नही अब प्यार हमसे
दर्दे दिल बताऊ कैसे

कैसे जला आशियाना मेरा
लगी आग अब बुझाऊ कैसे

हुई खता क्या बताओ जरा
उलझी गुत्थी सुलझाऊ कैसे

रूठ गई तो कोई बात नहीं
बस इतना बताओ मनाऊ कैसे

देवेन्द्र"सागर"
३१-०८-२०१४



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