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Friday, August 29, 2014

ख़त तेरी तहरीर का


ख़त तेरी तहरीर का किताब में मिला पुराना
याद आगया मुझे बो मेरा गुजरा जमाना

गिला लिखा ना शिकबा लिखा बस प्यार लिखा
लिखा खुद को लैला मुझ को मजनू दीवाना

बो तेरी बू-ऐ-वदन ख़त में आज भी है बरक़रार
तेरा हर अक्षर गुन गुनता तेरा  प्यार का फसाना

फिर खतो में जीने लगी मेरी प्रेम कहानी
आज भी दिखता है इन में तेरे अश्को का पानी

याद आगया प्यार बाला बो मौसम सुहाना
बो बागो में बुलाना तेरा सिर रखकर सोजना

रखे ख़त सरे किताबो में जैसे वेसुमार खजाना
याद आता है तेरा खत पर होटों के निशा लगाना

देवेन्द्र "सागर"
२९-०८-२०१४

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