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Sunday, August 17, 2014

तडफता दिल

तडफता रहा दिल ये मेरा
तडफता हुआ ही छोड़ गया

दिल तो सिर्फ दिल ही था
खिलौना समझ कर तोड़ गया

बो क्या जाने दर्द किसी का
जो देके दर्द  और  गया

घावो से भरा जिस्म मेरा
बो एक और जख्म जोड़ गया

कैसे होगा ख़त्म सफ़र जिन्दगी
बो जीवन का ही रुख मोड़ गया

देखी थी वफा हरदम जिसमे
बो वफा का आइना ही तोड़ गया

  देवेन्द्र "सागर"
17-08-2014

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