कहे ब्रज की प्रजा सारी
रूठे इंद्र गुस्सा बहुत भारी
बादल गरजे विजली चमके
मची ब्रज में खूब आहकरी
फटे बादल वर्षे पानी
देख क्रोध देव इन्द्र का
ब्रज प्रजा है थर्रानी
घबराई प्रजा चिल्लानी
बड़ा वाल कृष्ण खड़ा आगे
मैं हूँ डरो नहीं नाही कोई भागे
उठाया ऊँगली पर्वत गोवर्धन
बुलाये नीचे ब्रजवासी सारे
बाल ना बाँका हुआ किसीका
देव इंद्र खूब रहे पश्च्ताये
तोड़ घमण्ड देव इन्द्र का
मुस्काये और गोबर्धन पूजबाये...
देवेन्द्र सगर "सागर"
24/10/2014



