Followers

Friday, October 24, 2014

गोबर्धन



कहे ब्रज की प्रजा सारी
रूठे इंद्र गुस्सा बहुत भारी
बादल गरजे विजली चमके
मची ब्रज में खूब आहकरी

फटे बादल वर्षे पानी
देख क्रोध देव इन्द्र का
ब्रज प्रजा है थर्रानी
घबराई प्रजा चिल्लानी

बड़ा वाल कृष्ण खड़ा आगे
मैं हूँ डरो नहीं नाही कोई भागे
उठाया ऊँगली पर्वत गोवर्धन
बुलाये नीचे ब्रजवासी सारे

बाल ना बाँका हुआ किसीका
देव इंद्र खूब रहे पश्च्ताये
तोड़ घमण्ड देव इन्द्र का
मुस्काये और गोबर्धन पूजबाये...

देवेन्द्र सगर "सागर"
24/10/2014

No comments:

Post a Comment