भावनाओं का सागर
मेरे दिल में उमड़तीं हुईं भावनाएं
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Tuesday, October 14, 2014
"आदमी"
गलतियों का पुतला है आदमी
आदमी आदमी ही क्यूँ रहता
आदमी फिर खुदा ना होता.....
फितरत है भूलने की आदमी को
समझता सब आदमी तो
आदमी आदमी से जुदा न होता.....
देवेन्द्र "सागर"
13/10/2014
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