Followers

Sunday, August 31, 2014

मनाऊ कैसे


दर्द है कितना बताऊ कैसे
दास्ताँ दिल की सुनाऊ कैसे

"दिया" तो है पास मेरे
बिन बाती जलाऊं कैसे

करते नही अब प्यार हमसे
दर्दे दिल बताऊ कैसे

कैसे जला आशियाना मेरा
लगी आग अब बुझाऊ कैसे

हुई खता क्या बताओ जरा
उलझी गुत्थी सुलझाऊ कैसे

रूठ गई तो कोई बात नहीं
बस इतना बताओ मनाऊ कैसे

देवेन्द्र"सागर"
३१-०८-२०१४



Friday, August 29, 2014

ख़त तेरी तहरीर का


ख़त तेरी तहरीर का किताब में मिला पुराना
याद आगया मुझे बो मेरा गुजरा जमाना

गिला लिखा ना शिकबा लिखा बस प्यार लिखा
लिखा खुद को लैला मुझ को मजनू दीवाना

बो तेरी बू-ऐ-वदन ख़त में आज भी है बरक़रार
तेरा हर अक्षर गुन गुनता तेरा  प्यार का फसाना

फिर खतो में जीने लगी मेरी प्रेम कहानी
आज भी दिखता है इन में तेरे अश्को का पानी

याद आगया प्यार बाला बो मौसम सुहाना
बो बागो में बुलाना तेरा सिर रखकर सोजना

रखे ख़त सरे किताबो में जैसे वेसुमार खजाना
याद आता है तेरा खत पर होटों के निशा लगाना

देवेन्द्र "सागर"
२९-०८-२०१४

Thursday, August 28, 2014

प्यास

     
     बो प्यार के लम्हों को 
     फिर से जीना चाहता हूँ....
     तू प्यास है जिन्दगी की
     आ तुझे में पीना चाहता हूँ...

     देवेन्द्र "सागर"

Sunday, August 24, 2014

गरीबी


इस बेरहम दुनिया मे ढूढ़ते है
आशियाना कोई......
खाने को दो वक़्त का भोजन
रहने को ठिकाना कोई.....

ठण्ड से हे  जकड़े ,
तन पर नहींकोई कपड़े ....
उनसे माँगने को उतरन
सोचते है बहाना कोई......

ना देखते ख्बाब अमीरी के
ना चाहत है पैसो की.....
बस लुटा दे हमपर बेसुमार
प्यार का खजाना कोई.....

देवेन्द्र "सागर"
२४-०८-२०१४

Thursday, August 21, 2014

एहसास


वेबसी,बेहयाई के घुंगरू
पिरोह कर
पहना दिया गहना पैरो का.......

भरोषे का सिला नबाजा
तुमने
बनाकर खिलौना महफ़िल
में गिरो का....

हँसती रही हँसाती रही
नाचती रही गाती रही
खुद का दिल रुलाकर
बहलाया मेने ओरो का......

पछता रही हूँ अपनी
महोब्बत पर
क्यूँ देखा था खुआब
शहरो का.....

गम गुसारी मिलता
नहीं कोई
ए तो शहर है गुंगो-
बहरो का........

किस हुजूम में खो गयी
मुज्तरिब है दिल
"सागर" अब ना भरोसा करना
अपना समझकर गिरो का......

वरना बेच देगा तुझे भी कोई
फिर खाता रहना थपेड़ा
पश्चाताप की लहरों का......

देवेन्द्र "सागर"
२०-०८-२०१४


Sunday, August 17, 2014

तडफता दिल

तडफता रहा दिल ये मेरा
तडफता हुआ ही छोड़ गया

दिल तो सिर्फ दिल ही था
खिलौना समझ कर तोड़ गया

बो क्या जाने दर्द किसी का
जो देके दर्द  और  गया

घावो से भरा जिस्म मेरा
बो एक और जख्म जोड़ गया

कैसे होगा ख़त्म सफ़र जिन्दगी
बो जीवन का ही रुख मोड़ गया

देखी थी वफा हरदम जिसमे
बो वफा का आइना ही तोड़ गया

  देवेन्द्र "सागर"
17-08-2014

raakhi


राखी का धागा है कच्चा
पर इस से बंधा भाई-बहन
का प्यार है पक्का..
देता वचन भाई
मरते दम तक करुगा रक्षा....

ए मेरे भाई आज प्यार-दुलार
का ये धागा टूट रहा है....
ये जिश्म का भूका भेड़िया
कैसे-कैसे तुम्हारी बहन को
लूट रहा है.....

कब तक इन से डरो गे
कब तक और धेर्य धरो गे
कब तक देखते और
सुनते रहो गे
क्यों नहीं तूम्हारा
सब्र का बांध टूट रहा है....

कभी तुम्हारी बहन को
रोंदा जाता है....
कभी उसके अंगो को
भेदा जाता है.....
कभी नग्न करके
फेका जाता है....
कभी पेड़ो पर निर्वस्त्र
लटका दिया
जाता है.........!!
उस पेड़ की डाली
भी शर्म से
झुक जाती है
ये तुम से कैसे
देखा जाता है......
भाई तुम्हारा रक्षा हेतू
वचन टूटे ना....
अब कोई दरिंदा तुम्हारी
बहन को लू टे ना....

कब तक अचेतन रहोगे
जागो भाई....
बहन की अस्मिता पर खतरे को
भंपो भाई...
बहन बहन होती है
अपनी हो या पराई....
तुम्हे आज राखी की है
दुहाई...
बन क्रष्ण जो अपनी
बहन की
लाज न बचाई.....

देवेन्द्र "सागर"
०६-०८-२०१४






Monday, August 4, 2014

शेर


सरगिराँ ना हो
मेरी महोब्बत से,
दिल में ना सही
घर में रहने दे
संग-ऐ-आस्ताँ
बनकर.....
देवेन्द्र "सागर"


Saturday, August 2, 2014

बाल विवाह


कर के बाल विवाह क्यों
     बच्चो पर अत्याचार करते हो
पढने-खेलने के दिन हे क्यों
     बचपन से खिलबाड़ करते हो
जन्म दाता माँ-बाप हो उनके
      नफरत करते हो या प्यार करते हो

~~~~~~~~~~~

माँ छोटी बहुत लडो तेरी
तुझे छोड़कर कैसे जाऊँगी
रो-रो कर मर जाऊँगी
अभी विवाह नहीं करबाउगी

             रो-रो कर मर जाऊँगी
             माँ विवाह नही करबाउगी

उठता नहीं बस्ते का बोझ
गिरस्ती का बोझ कैसे उठाउगी
लिखना-पढना सब छूटेगा
मैं अनपढ़ ही रह जाऊँगी

           रो-रो कर मर जाऊँगी
           माँ विवाह नहीं कर बाउगी

यहाँ खाना माँ तू पकाती
हाथो से अपने मुझे खिलाती
जल जाऐगे मेरे नन्हें हाथ
मैं खाना कैसे पकाउगी

           रो-रो कर मर जाऊँगी
           माँ विवाह नहीं करबाउगी

माँ अभी तू लोरी गाती
मैं रख सर गोदी मे सोजाती
डर जाती तेरी लाडो परछाई से
वहाँ तुझबिन कैसे रहपाउगी

           रो-रो कर मर जाऊँगी
           माँ विवाह नहीं करबाउगी

माँ कली हूँ तेरी बगिया की
खिल के शोभा बडाऊँगी
खिलने से पहले टूट गई तो
यूँ ही मुरझा के रह जाऊँगी

           जीते- जी मर जाऊँगी
           माँ विवाह नहीं कर बाउगी

माँ कहते है लोग कई
बाल विवाह अपराध बड़ा
तेरी माँ अपराधी है
ऐ कैसे मैं  सुन पाउगी

           रो-रो कर मर जाऊँगी
           अभी  विवाह नहीं करबाउगी

देवेन्द्र "सागर"
०१-०८-२०१४