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Sunday, August 17, 2014

raakhi


राखी का धागा है कच्चा
पर इस से बंधा भाई-बहन
का प्यार है पक्का..
देता वचन भाई
मरते दम तक करुगा रक्षा....

ए मेरे भाई आज प्यार-दुलार
का ये धागा टूट रहा है....
ये जिश्म का भूका भेड़िया
कैसे-कैसे तुम्हारी बहन को
लूट रहा है.....

कब तक इन से डरो गे
कब तक और धेर्य धरो गे
कब तक देखते और
सुनते रहो गे
क्यों नहीं तूम्हारा
सब्र का बांध टूट रहा है....

कभी तुम्हारी बहन को
रोंदा जाता है....
कभी उसके अंगो को
भेदा जाता है.....
कभी नग्न करके
फेका जाता है....
कभी पेड़ो पर निर्वस्त्र
लटका दिया
जाता है.........!!
उस पेड़ की डाली
भी शर्म से
झुक जाती है
ये तुम से कैसे
देखा जाता है......
भाई तुम्हारा रक्षा हेतू
वचन टूटे ना....
अब कोई दरिंदा तुम्हारी
बहन को लू टे ना....

कब तक अचेतन रहोगे
जागो भाई....
बहन की अस्मिता पर खतरे को
भंपो भाई...
बहन बहन होती है
अपनी हो या पराई....
तुम्हे आज राखी की है
दुहाई...
बन क्रष्ण जो अपनी
बहन की
लाज न बचाई.....

देवेन्द्र "सागर"
०६-०८-२०१४






1 comment:

  1. रेशम का धागा है पर
    जज्बातो की बहार है "राखी"
    बहन का भाई से
    अनकहा प्यार है "राखी"
    "सागर"

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