मेरा दिल मिटटी सा खिलोना
तुम को कितना भाएगा
रखना कदम आहिस्ता मेरी जिंदगी मैं
एक ठेस भी झेल ना पाएगा
ना रखा संभलकर गर
टूट कर बिखर जायेगा
खिलोना है भावनाओ का संवेदनाओ का
जो टूट गया एक बार तो फिर न जुड पाएगा
मेरा दिल मिटटी सा खिलोना
मिटटी में ही मिल जाएगा ......
देवेन्द्र " सागर "
०१-०४-२०१४
सही बात 👍
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