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Monday, April 14, 2014

मिट्टी सा खिलौना




मेरा दिल मिटटी सा खिलोना
तुम को कितना भाएगा

रखना कदम आहिस्ता मेरी जिंदगी मैं
एक ठेस भी झेल ना पाएगा

ना रखा संभलकर गर
टूट कर बिखर जायेगा

खिलोना है भावनाओ का संवेदनाओ का
जो टूट गया एक बार तो फिर न जुड पाएगा

मेरा दिल मिटटी सा खिलोना
मिटटी में ही मिल जाएगा ......

देवेन्द्र " सागर "
०१-०४-२०१४ 

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