भावनाओं का सागर
मेरे दिल में उमड़तीं हुईं भावनाएं
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Wednesday, April 16, 2014
दिलजले
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दिलजले
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आज उन्होंने इस दिलजले मिटाने की कसम खाई है
नादान है बो कही मुर्दों को भी मोत आई है.........
देवेन्द्र "सागर"
1 comment:
Devendra Sagar
April 17, 2014 at 5:09 PM
सभी पाठको को सहिर्दय धन्यबाद जी.....
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